Sunday, February 12, 2017

धूप

सोचा थोडा धूप मे घुम लू…जिंदगीको थोडा और तराश लू…
फिर लिखुंगा कुछ लम्हे सोच समझकर
फिर कविता भि आयेगी ईक बहार बनकर
आइना है जिंदगी का यह धूप
दिखाती हैं हर ईक का सचा रुप
निखारती हैं जीवन को कुछ इस तरह
रोशन कर जाती हर पल यह धूप
– दर्शन

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